मेरी तन्हाई..मेरी नज़्म..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

मेरी तन्हाई आज यूं मुझसे मिल कर रोई….सखी बचपन की बिछड़ी मिली हो जैसे कोई…पल भर में ही हो गयी फिर से वो मेरी….गिला शिकवा लब पे रहा न उसके कोई…मंज़र मेरी तबाही का बह गया सारा…आंसुओं में उसके सुकूँ मिला जैसे कोई….आठों पहर हर पल का साथ था अपना…यह तो मैं था जो मुझको मिल गया कोई…बेवफा वो न थी, संगदिल मै ही निकला…सजा मेरी खता की मिली उसे जैसे कोई…हर पल साथ निभाने का वादा किया था मैंने…यूं भूला मैं जैसे अदावत थी उससे कोई….तुम बिन नहीं जीना अब सोच लिया मैंने…सांस चले या रुके और न होगा अब कोई…तू मेरी है मैं तेरा अब न बिछड़ेंगे कभी….भूल जाऊं तुझे ऐसी खता न होगी अब कोई…तुमको छोडूंगा नहीं तुम भी न छोड़ोगी मुझे….वादा है तुझपे सितम न करूंगा अब कोई…साथ जन्मों का रहेगा यह भी वादा अपना…नहीं तोड़ेगा प्यार का यह बंधन अब कोई…तू ही तो अब दर्द, नज़्म ओ ग़ज़ल कल्म मेरे की….बिन तेरे हर्फों की न इसकी ही है कीमत कोई….तू मेरा इश्क़ मेरा वजूद है मेरी तन्हाई….सिवा तेरे न होगी किसी और से मुर्रवत अब कोई…\/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

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12 Comments

  1. डी. के. निवातिया 15/11/2017
    • C.M. Sharma 16/11/2017
  2. ANU MAHESHWARI 15/11/2017
    • C.M. Sharma 16/11/2017
  3. Bindeshwar Prasad sharma 15/11/2017
    • C.M. Sharma 16/11/2017
  4. Shishir "Madhukar" 16/11/2017
    • C.M. Sharma 17/11/2017
  5. अरुण कान्त शुक्ला 16/11/2017
    • C.M. Sharma 17/11/2017
  6. Kajalsoni 19/11/2017
    • C.M. Sharma 20/11/2017

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