नाव में पतवार नहीं

नाव में पतवार नहींहुजूर, आप जहां रहते हैं,दिल कहते हैं,उसे ठिकाना नहीं,शीशे का घर हैसंभलकर रहियेगा, हुजूरटूटेगा तो जुड़ेगा नहीं,यादों की दीवारे हैंइश्क का जोड़बेवफाई इसे सहन नहीं,ओ, साजिशें रचने वालोघर तुम्हारा हैक्या इसका एतबार नहीं?अपना रास्ता खुद बनायामोहताज न रहासरपरस्ती मेरी पसंद नहीं,वायदों पे एतबार न करनाझूठे होते हैंकरने वाले कहते नहीं,मकां छोड़कर न जानाभले लोग अबआसानी से मिलते नहीं,ओ, एतबार करने वालोआँखें तो खोलोनाव में पतवार नहीं,उसे देना था मुश्किलेंवो देता रहामुस्कराहटों में मेरी आई कमी नहीं,अरुण कान्त शुक्ला, 9/11/2017

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8 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 09/11/2017
  2. C.M. Sharma 10/11/2017
  3. डी. के. निवातिया 10/11/2017
  4. SARVESH KUMAR MARUT 10/11/2017
  5. Madhu tiwari 10/11/2017
  6. Bindeshwar Prasad sharma 11/11/2017
  7. Shishir "Madhukar" 11/11/2017
  8. अरुण कान्त शुक्ला 11/11/2017

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