दिल्लगी में दिल दुखाने का मजा कुछ और है…ग़ज़ल

*उम्र पल भर में बिताने का मजा कुछ और है..*(ग़ज़ल)अरकान- फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुनदिल्लगी में दिल दुखाने का मजा कुछ और है।रूठकर उनको सताने का मजा कुछ और है।जब कभी चाहा हमें रुसवा जमाने ने किया।इस जहां में आजमाने का मजा कुछ और है।वो बने कातिल किये थे कत्ल मेरी रूह का।वाकया हमदम सुनाने का मजा कुछ और है।बन्दगी की ये खता करता रहा ताजिन्दगी,आरजू में सिर झुकाने का मजा कुछ और है।है गरज हमको कहाँ मिलते रहें उस मोड़ पे।राह में नजरें बिछाने का मजा कुछ और है।हसरते जन्नत ही क्यूँ देखा करें हम हर दफ़ा।जश्न दोज़ख में मनाने का मजा कुछ और है।मौत आ जाए ‘अरुण’ या सौ बरस जिंदा रहें।उम्र पल भर में बिताने का मजा कुछ और है। -‘अरुण’

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7 Comments

  1. C.M. Sharma 05/11/2017
  2. Shishir "Madhukar" 05/11/2017
  3. Madhu tiwari 05/11/2017
  4. अरुण कान्त शुक्ला 05/11/2017
  5. Bindeshwar Prasad sharma 06/11/2017
  6. Dknivatiya 06/11/2017
  7. SARVESH KUMAR MARUT 10/11/2017

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