तेरी अदायें

तेरी अदाओं ने जो आज मुझको मारा हैलगता है आज फिर से दिल हमारा हारा हैतेरी हँसी ने आज ऐसा काम किया हैआया है जैसे आँसमा से कोई तारा है

 कवि – मनुराज वार्ष्णेय

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8 Comments

  1. C.M. Sharma 01/11/2017
  2. Kiran kapur Gulati 01/11/2017
  3. डी. के. निवातिया 01/11/2017
  4. Madhu tiwari 02/11/2017
  5. Harsh 04/11/2017

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