मेरी कहानी मेरी जुबानी भाग-2 (POEM No. 21) CHANDAN RATHORE

कुछ साल और निकले में पढता रहा सब मुझे पढ़ाते रहेआ गया वो दिन जिस दिन होना था माँ से दूरसब छोड़ गये अकेले कोई नही था मेरे पासअकेले ही लड़ना था दुनिया सेनिकल पड़ा लड़ने दुनिया सेअब में खुद निर्णय लेने लगा दिल सेकुछ दुनिया से सिखाकुछ दुनिया को सिखायाकई गम सहे कई गम पियेकुछ दिन अपने ही घर में टिफिन भी खायाकुछ दिन अपने देश में भी होटल पे खायाजिन्दगी में गमो ने जेसे घर ही बना लिया थारोता अकेले में पर कोई आंसू पोछने वाला ना थाऊधार जेसे मेरे सर पे हो दुनिया का ऐसा लगने लगा थाधीरे धीरे वो दिन भी निकलेवो तो करम थे मेरे पिछलेहर गम मुझे कुछ ना कुछ सिखा के गयाहर गम मुझे एक सीडी ऊपर चढ़ा के गयावो गम ना होते आज में ऐसा ना होताना में कुछ बन पाता ना कुछ मुझे मिल पातागमो ने नोकरी करना भी सिखाया3 महीने फ्री फिर 600 फिर 6 महीने 1200 में किया मेने कामफिर उदयपुर आके मेने किया अपना नामकाम और पढाई दोनों किया मेने साथ -साथऔर परीक्षा से भी किये मेने दो -दो हाथपर गम तो हमेशा साथ ही रहाधीरे धीरे गम ने लिखना सिखायाजिसको समझाना था उसको कुछ समझा ना पायालिखता रहा दिल से अपने अरमानो कोउतारता रहा कागजो पे अपने जख्मो कोहँसकर निकालता रहा अपने गमो को”मेरी जिन्दगी एक कहानी हेमें उसका वो मेरी दीवानी हेकेसे करू साकार मेरा हर एक सपनाबस छोटी सी मेरी जिंदगानी हे “बस इसी तरह जी रहा अपनी जिन्दगी कोलेखक – चन्दन राठौड़(http://m.facebook.com/rathoreorg20)12:02 amTue 20-11-2012

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  1. C.M. Sharma 31/10/2017

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