ज़िन्दगी तेरी राहों में – शिशिर मधुकर

मुहब्बत ढूँढी पुतलों में तो बस धोखे मिलें मुझको ज़िंदगी कैसे कह दूँ मेहरबान आखिर बता तुझको चले बस सच की राहों पे तो देखो कुछ ना पाया है डगर तपती है शोलों सी ना दिखती कोई छाया हैजवानी ढल गई अब तो ना कोई अरमां मचलते हैं ज़िन्दगी तेरी राहों में हम तन्हा रह कर सम्भलते हैंवक्त रहता नहीं है एक सा ये सुनते आए हैं कब सेकभी हम पे भी हो उसकी महर कह दे कोई रब सेखुदी को कर बुलंद तब ही खुदा जब पास हो तेरेरजा लेगा ना कोई वरना और मिलेंगे तुझको अंधेरे शिशिर मधुकर

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16 Comments

  1. kiran kapur gulati 29/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 29/10/2017
  2. Madhu tiwari 29/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 29/10/2017
  3. Anu Maheshwari 29/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 29/10/2017
  4. Bindeshwar prasad sharma 29/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 29/10/2017
  5. C.M. Sharma 30/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 30/10/2017
  6. Ram Gopal Sankhla 30/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 30/10/2017
  7. डी. के. निवातिया 30/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 30/10/2017
      • डी. के. निवातिया 31/10/2017
        • Shishir "Madhukar" 31/10/2017

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