मुझे देखकर तुम (युगल गीत)   … भूपेन्द्र कुमार दवे

मुझे देखकर तुम (युगल गीत) गायक“मुझे देखकर तुम मुस्कराती दिखी होमोहब्बत के गजरे सजाती मिली हो।“गायिका“मुझे देखकर तुम मुस्कराते दिखे होशरारत के जल्वे दिखाते मिले हो।“गायक“मुझे देखकर तुम मुस्कराती दिखी होसभी सपने सुहाने सजाती मिली हो।अब सृजन प्यार का कुछ होने लगेगाबिन पिये नशा सा भी छाने लगेगा।“गायिका“मुझे देखकर तुम मुस्कराते दिखे होतुम भ्रमरों के गुंजन सुनाते मिले हो।अब बगिया में बहार आती मिलेगीमहक फूलों की गुदगुदाती मिलेगी।“गायक“इजाजत मिली है अब तुमसे हमी कोमहकते मिलन की मुस्काती हमी को।“गायिका“अब बारिश रिझाती मिली है जमी कोशबनम की बूँदों-सी खिलती कली को।“गायक“नजर नरगिस की अब शर्माने लगी हैं।“गायिका“महक गुलाब की भी लजाने लगी हैं।“गायक“रात रानी की महक आने लगी है”गायिका“रात प्यारी भी झिलमिलाने लगी है।“गायक“मुझे देखकर तुम मुस्कराती दिखी होहर डगर प्यार की सजाती मिली हो।“गायिका“मुझे देखकर तुम मुस्कराते दिखे होपराग प्यार का तुम लुटाते मिले हो।“दोनों“मुझे देखकर तुम मुस्कराते दिखे हो।“             … भूपेन्द्र कुमार दवे  

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5 Comments

  1. Ram Gopal Sankhla 26/10/2017
    • bhupendradave 26/10/2017
  2. C.M. Sharma 27/10/2017
  3. डी. के. निवातिया 27/10/2017
  4. Shishir "Madhukar" 29/10/2017

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