दीप और बाती – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

तुम रुई बनो मैं माटी तुम दीप बनो मैं बाती।हम दोनों मिल जायेंगे प्यारे दीप जल जायेंगे। दूर होगा सब अंधियारा फैलेगा अब उजियारा।। तुम सीप बनो मैं मोती मैं आंख बनूं तुम ज्योति। यहां रोज – रोज दिवाली गणेश पूजा लक्ष्मी काली। जहां दिल से दिल मिल जाये फूल खुशियों के खिल जाये।। तुम चांद बनो मैं चांदनी तुम गीत बनो मैं रागिनी। प्रेम ही पूजा – भक्ति मिल जाये तो है शक्ति।स्नेहिल दीपों का त्योहार धर्म विजय का जय जयकार ।। तुम रुई बनो मैं माटी तुम दीप बनो मैं बाती ।सारे साहित्य जगत को इस पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं। जय हिंद।।

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20 Comments

  1. डी. के. निवातिया 17/10/2017
    • Bindeshwar Prasad sharma 18/10/2017
  2. Madhu tiwari 17/10/2017
    • Bindeshwar Prasad sharma 18/10/2017
  3. Shishir "Madhukar" 17/10/2017
    • Bindeshwar Prasad sharma 18/10/2017
  4. sarvajit singh 17/10/2017
    • Bindeshwar Prasad sharma 18/10/2017
  5. SALIM RAZA REWA 17/10/2017
    • Bindeshwar Prasad sharma 18/10/2017
  6. Anu Maheshwari 18/10/2017
    • Bindeshwar Prasad sharma 18/10/2017
  7. C.M. Sharma 18/10/2017
    • Bindeshwar Prasad sharma 18/10/2017
  8. kiran kapur gulati 18/10/2017
    • Bindeshwar Prasad sharma 18/10/2017
    • Bindeshwar Prasad sharma 18/10/2017
  9. Ram Gopal Sankhla 26/10/2017
  10. Bindeshwar Prasad sharma 26/10/2017

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