अरमान मचलते रहते हैं

मन का चलन कुछ है ऐसा कि अरमान मचलते रहते हैं पा जाने को दुनिया सारीदिन रात में ढलते रहते हैं नील गगन में उड़ते बादल छमछम बरसते रहते हैं ठंडी हवा के झोंके भी तरानों में बदलते रहते हैं तितलियोँ का डोलना फूलों पर रंग और ख़ुशबु संग २ बहते हैं पूछो किसी उपवन से अगर जो इन सबको खिलाए रहते हैं होते हैं गहरे कई भेद बहुत जो मन में समाए रहते हैं ठहरे जो मन मुमकिन ही नहीं रंग हर पल बदलते रहते हैं झरनों से ली है चंचलता मौजों से मचलते रहते हैं न जाने किस थिरकन पे मधुर राग बिखरते रहते हैं मन का चलन कुछ है ऐसा कि अरमान मचलते रहते हैं है मन का साथ अरमानों से जो साथ है चोली दामन का हो जाएँ जुदा संम्भव ही नहीं सदा रंग रूप में ढलते रहते हैं मन का चलन कुछ है एैसा कि अरमान मचलते रहते हैं

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21 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 15/10/2017
    • kiran kapur gulati 15/10/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma 15/10/2017
    • kiran kapur gulati 15/10/2017
  3. sarvajit singh 15/10/2017
    • kiran kapur gulati 15/10/2017
  4. SALIM RAZA REWA 15/10/2017
    • kiran kapur gulati 15/10/2017
  5. C.M. Sharma 15/10/2017
    • kiran kapur gulati 15/10/2017
  6. Madhu tiwari 16/10/2017
    • kiran kapur gulati 16/10/2017
  7. अरुण कान्त शुक्ला 16/10/2017
    • kiran kapur gulati 16/10/2017
  8. डी. के. निवातिया 17/10/2017
  9. kiran kapur gulati 18/10/2017
  10. kiran kapur gulati 18/10/2017
  11. kiran kapur gulati 18/10/2017
  12. Ram Gopal Sankhla 26/10/2017
  13. kiran kapur gulati 27/10/2017

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