चौपाई – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

बिनु ज्ञान नहीं उतरै पारा श्रम बिनु नाहीं होत किनारा। निश्छल मनवां करै विचारा कलियुग कै बस प्रेम अधारा।वश में राखौ आपन नैना बड़ सुकून से बीतै रैना। जो जिभ्या को कर लै वश में डूबि रहै जीवन के रस में। मति फेरौ कुमति सब त्यागो सुमति लिआय सभै कोइ जागो। आपन करम याद तुम राखौ जस करतब वैसा फल चाखौ।

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7 Comments

  1. kiran kapur gulati 13/10/2017
  2. sarvajit singh 14/10/2017
  3. Shishir "Madhukar" 14/10/2017
  4. Anu Maheshwari 14/10/2017
  5. C.M. Sharma 15/10/2017
  6. Madhu tiwari 16/10/2017
  7. डी. के. निवातिया 17/10/2017

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