मेरे दिलबर तेरी सूरत ही मुझको रास आती है

जुदा हो करके के तुमसे अब ,तुम्हारी याद आती हैमेरे दिलबर तेरी सूरत ही मुझको रास आती हैकहूं कैसे मैं ये तुमसे बहुत मुश्किल गुजारा हैभरी दुनियां में बिन तेरे नहीं कोई सहारा हैमुक्कद्दर आज रूठा है और किस्मत आजमाती हैनहीं अब चैन दिल को है न मुझको नींद आती है..कदम बहकें हैं अब मेरे ,हुआ चलना भी मुश्किल हैये मौसम है बहारों का , रोता आज ये दिल हैना कोई अब खबर तेरी ,ना मिलती आज पाती हैहालत देखकर मेरी ये दुनिया मुस्कराती हैबहुत मुश्किल है ये कहना किसने खेल खेला हैउधर तन्हा अकेली तुम, इधर ये दिल अकेला हैपाकर के तन्हा मुझको उदासी पास आती हैसुहानी रात मुझको अब नागिन सी डराती हैमेरे दिलबर तेरी सूरत ही मुझको रास आती हैमदन मोहन सक्सेना

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  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/10/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 12/10/2017

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