तुम्हे पढ़ना नहीं आया

जिंदगी की क़िताब कुछ बिखरने सी लगी हैबेचने की ख़ातिर इसे मुझे मढ़ना नहीं आया ||लोग कहते है कि मुझे पत्थर गढ़ना नहीं आयातुम्हे क्या ख़ाक लिखता तुम्हे पढ़ना नहीं आया ||खुद से ही लड़ता रहा खुद की ही ख़ातिर मेंतुम्हारे लिए ज़माने से मुझे लड़ना नहीं आया ||मेरे साथ और लोग थे सब आगे निकल गएमै अब तक वही हूँ मुझे बढ़ना नहीं आया ||

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

10 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 12/10/2017
    • shivdutt 12/10/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/10/2017
    • shivdutt 13/10/2017
  3. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 12/10/2017
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/10/2017
  5. md. juber husain md. juber husain 13/10/2017

Leave a Reply