अरमानों पे पानी फिर गया

न खिली आज है कोई कली , न दिखता सूरज यहां वहांबस तड़पन पीर उदासी छायी , ये नजरे देखे जहां जहांक्यों बरसे न बादल ये आज , बेमतलब आसमाँ घिर गयाअरमानों पे पानी फिर गया |अरमानों पे पानी फिर गया ||राहों के फूल बने है शूल , कुछ साफ नही चहु ओर ही धूलक्यो बातें उलट पुलट मन में , क्यों भूल गए वो बातें मूलनाराज सभी होते जल्दी क्यों , बोते न वो बीज प्यार केकैसे दिन अब आ गए है , है दिन कहां वो मलय बयार केसब चोरी सीनाजोरी जाने , ईमान सबका कहीं गिर गयाअरमानों पे पानी फिर गया |अरमानों पे पानी फिर गया ||ओ मनु ! आज की हालत देखो , बस दुख ही दुख तुम पाओगेजो सृष्टि रची आदि में तुमने , वैसा न अब कुछ तुम पाओगेवीणा का स्वर , कोयल की कूँ कूँ , तुलसी के गान न गूंजते अबभूल गए है अपनो का प्यार , बस अहम का स्वर साधे है सबदीपक की लौ जलती थी तब , ज्वाला का धुँआ अब घिर गयाअरमानों पे पानी फिर गया |अरमानों पे पानी फिर गया || कवि – मनुराज वार्ष्णेय 

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

8 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 09/10/2017
  2. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 09/10/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/10/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 12/10/2017

Leave a Reply