फर्क — डी के निवातिया

फर्क

***

मै भी तो जर्रा हूँ उस बनौरी काजिसके सदा तुम सजदे करते हो !क्या फर्क है उसमें और मुझमेउसे शिखर, मुझे तलवे रखते हो !!!हम शौक रखते नायाब नगीनो काहर पत्थर को दिल कि हवेली नहीं रखते !बेशकीमती होता है हर तराशा पत्थरटूटी तो हम मूरत ईश की भी नहीं रखते !!!!!डी के निवातिया

*** *** ***

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/10/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 07/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/10/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 07/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/10/2017
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 08/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/10/2017
  5. sarvajit singh sarvajit singh 08/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/10/2017
  6. C.M. Sharma C.M. Sharma 09/10/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/10/2017

Leave a Reply