ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

“बात वही है मधुकर साहब, अंदाज बदल गये तर्ज़ वही है निवातिया जी आवाज़ बदल गये।” हम उनके रास्ते से हट गये तो क्या हुआ अपनी औकात से ही घट गये तो क्या हुआ। उनके जुस्तजू ने हमें नहीं छोड़े कहीं के पतंग की डोर के तरह कट गये तो क्या हुआ। वफ़ा जिंदगी से निहारते ही रह गये उनको उनके याद बिस्तर में लिपट गये तो क्या हुआ। गुफ्तगू में हमनें भी कोई कसर नहीं छोड़े जमाने के आगे हम सिमट गये तो क्या हुआ। पागल-मलंग – दिवाना यूंही नहीं कहता कोई इस सफर में “बिन्दु”भी भटक गये तो क्या हुआ।

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6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/10/2017
  2. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 05/10/2017
  3. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 05/10/2017
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/10/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/10/2017