वो इत्तफाक नहीं – शिशिर मधुकर

मेरे हाथों में तेरा हाथ… जब भी आता है मैं दिल के पास हूँ तेरे..पता चल जाता है तेरे सीने से लग…मुझको सुकून मिलता है सारे ग़म छोड़ के…ये मन भी मुस्कुराता है कई साथी मिला करते हैं….राहे उल्फ़त मेंहर कोई ना मगर..वफ़ाओं के गीत गाता है किसी की सांस में जो सांस अपनी घुल जाएवो इत्तफाक नहीं….जन्मों का एक नाता है कई ग़म यूँ तो खुल के आएं हैं मेरे हिस्से मेंअपने वादों को मगर..मधुकर सदा निभाता हैशिशिर मधुकर

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14 Comments

  1. Bindeshwar Prasad sharma 06/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 06/10/2017
  2. C.M. Sharma 06/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 06/10/2017
  3. डी. के. निवातिया 06/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 06/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 07/10/2017
  4. ANU MAHESHWARI 06/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 07/10/2017
  5. sarvajit singh 06/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 07/10/2017
  6. Madhu tiwari 07/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 07/10/2017

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