कुछ लफ़्ज़ों का हिसाब

१.बिकना था सो बिक गए पर अरमानों के चूल्हे में जलती आग आज भी है।इश्क़ हो ना हो,आरजू तुझसे गुफ्तगू की,दिल के किसी कोने में बाकी आज भी है।।२. सदियो से जो खामोश थी,वो आवाज़ एक परछाई बन गूंज उठी।पर जाहिलों की कौम ने शोर उसे बता ,फिर दबा दिया।। 

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6 Comments

  1. Aman Nain Aman Nain 02/10/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/10/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 03/10/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/10/2017
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 05/10/2017

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