वक़्त

थक गयी हूँ माँ ,कोई लोरी सुना दो ना,बचपन की उस नींद को ,फिर से वापस बुला दो ना ,ज़माना बीत गया ,सुकून से सोए हुए,तुझसे लिपट कर ,मन की बात कहे हुए ,छुपा ले माँ अपने आँचल मे,ज़िक्र कर बस उस लम्हे का ,जो बचपन की   याद दिलाए ,देख माँ ,कैसे मेरी गुड़िया मुस्करा रही है ,इंतज़ार है उसको ,अपने श्रंगार का ,कैसे समझाऊं उसको वो वक़्त फिर नहीं आएगा ,जो मेरी नादानियों के किस्से सुनाएगा ,थक गयी हूँ माँ ,कोई लोरी सुना दो ना।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

11 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 01/10/2017
    • shalu verma 02/10/2017
  2. kiran kapur gulati 02/10/2017
    • shalu verma 02/10/2017
  3. Vikram jajbaati 02/10/2017
    • shalu verma 02/10/2017
  4. Madhu tiwari 02/10/2017
    • shalu verma 02/10/2017
  5. Shipra Agarwal 02/10/2017
    • shalu verma 03/10/2017

Leave a Reply