रंग लो कान्हा अपने रंग में

रंग लो कान्हा अपने रंग में रंग लिया तूने अपने रंग मेंअब ले चल कान्हा अपने संग मेंमोह में फँस सब कुछ भूलेचाहा बढ़ के गगन को छु लेंगहरी नींद से तूने जगायाजीवन का हर रंग दिखायाभोले थे कितना समझयाप्रीत का नया ढंग सिखायायाद तुम्हे जब करती हूँमौसम बदल से जाते हैंसूखी मुरझाई शाखाओं पेफूल भी रंग बरसाते हैंबादल बन आकाश को छूलेंभाव ऐसे भी आते हैंतेरे चरणो में जब आती हूँमन बांवरा हो जाता हैधीरज भी खो जाता हैचंचल विचलित मन यह मेराचैन की नींद सो जाता हैरंग लो कान्हा अपने रंग मेंअब लेलो कान्हा अपने संग में

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16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 01/10/2017
  2. kiran kapur gulati 01/10/2017
  3. ANU MAHESHWARI 01/10/2017
  4. kiran kapur gulati 01/10/2017
  5. kiran kapur gulati 01/10/2017
  6. C.M. Sharma 01/10/2017
    • kiran kapur gulati 01/10/2017
  7. sarvajit singh 01/10/2017
    • kiran kapur gulati 01/10/2017
    • kiran kapur gulati 04/10/2017
  8. Bindeshwar Prasad sharma 03/10/2017
    • kiran kapur gulati 04/10/2017
  9. डी. के. निवातिया 03/10/2017
    • kiran kapur gulati 04/10/2017

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