ग़ज़ल – दिलबर तुम कब आओगे . सलीम रज़ा रीवा

दिलबर तुम कब आओगे सबआस लगाए बैठे हैं “देखो फूलों से अपना घर – बार सजाए बैठे हैं “.हम तो उनके प्यार का दीपक दिल में जलाए बैठे हैं ” जाने क्यों वो हमको अपने दिल से भुलाए बैठे हैं “.किसको ख़बर थी भूलेंगे वो बचपन की सब यादों को “उनकी चाहत आज तलक हम दिल में बसाए बैठे हैं “.दिलकी बात जुबां तक आए ये नामुमकिन लगता है “ख़ामोशी में जाने कितने राज़ छुपाए बैठे हैं “.किसको दिलका दर्द दिखाएं किसको हाल सुनाएं हम “अपनी परेशानी का ख़ुद हम बोझ उठाये बैठे हैं “.वो बेगाने हो जाएंगे ऐसी ” रज़ा ” उम्मीद न थी “हम तो उनकी आज भी यादें दिल से लगाए बैठे हैं “SALIM RAZA REWA

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16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 29/09/2017
  2. C.M. Sharma 29/09/2017
  3. SALIM RAZA REWA 29/09/2017
  4. SALIM RAZA REWA 29/09/2017
    • C.M. Sharma 29/09/2017
  5. sarvajit singh 29/09/2017
  6. SALIM RAZA REWA 29/09/2017
  7. SALIM RAZA REWA 29/09/2017
  8. SALIM RAZA REWA 29/09/2017
  9. Kiran kapur Gulati 30/09/2017
  10. SALIM RAZA REWA 30/09/2017
  11. Madhu tiwari 01/10/2017
  12. SALIM RAZA REWA 01/10/2017
  13. डी. के. निवातिया 03/10/2017
  14. SALIM RAZA REWA 03/10/2017
  15. SALIM RAZA REWA 03/10/2017

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