वतन की किस्मत — डी के निवातिया

वतन की किस्मत

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गूंगो – बहरो ने मिलकर महफ़िल सजाई हैमिलजुलकर खाने खिलाने की कसमे खाई हैबारी बारी से बदलते रहते है अपनी कुर्सियांक्या खूब वतन की संसद ने किस्मत पाई है !!

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डी के निवातिया

 

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14 Comments

  1. SALIM RAZA REWA 28/09/2017
    • डी. के. निवातिया 13/10/2017
  2. kiran kapur gulati 28/09/2017
    • डी. के. निवातिया 13/10/2017
  3. C.M. Sharma 29/09/2017
    • डी. के. निवातिया 13/10/2017
  4. Shishir "Madhukar" 29/09/2017
    • डी. के. निवातिया 13/10/2017
  5. अरुण कान्त शुक्ला 29/09/2017
    • डी. के. निवातिया 13/10/2017
  6. sarvajit singh 29/09/2017
    • डी. के. निवातिया 13/10/2017
  7. Madhu tiwari 01/10/2017
    • डी. के. निवातिया 13/10/2017

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