अभी उम्मीद बाकी है – शिशिर मधुकर

समझ में आ गया मुझको यहाँ ना कोई साकी है मिलेगी कोई तो हाला अभी उम्मीद बाकी है बिना रोके जिसमे पिस रहा है हर पल यहाँ इंसान ज़िन्दगी जान लो मितरों सदा एक ऐसी चाकी है ना जाने कैसी ये फितरत मुझे बख्शी है कुदरत ने मुहब्बत के लिए मैंने तो हरदम राह ताकी है मेरी आशाओं को आखिर वो भी पूरा करे कैसे जिसने देना नहीं सीखा चाह पाने की जाकी है मुहब्बत मिल गई मधुकर मुझे जब भी ज़माने में उस जगह पहुँच जाने में कभी भी देर ना की है शिशिर मधुकर

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16 Comments

  1. SALIM RAZA REWA 26/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 26/09/2017
  2. C.M. Sharma 26/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 26/09/2017
  3. ANU MAHESHWARI 26/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 26/09/2017
  4. Bindeshwar Prasad sharma 26/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 26/09/2017
  5. डी. के. निवातिया 26/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 26/09/2017
  6. sarvajit singh 26/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 26/09/2017
  7. अरुण कान्त शुक्ला 27/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 27/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 27/09/2017

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