उसकी शोख़ नज़रों ने – ग़ज़ल

चांदनी है या कोई जुगनुओं की माला है,मेरे घर के आंगन में तुमसे ही उजाला है .उसकी ही हुक़ुमत है उस का बोल बाला है,जिसके हाथ है कुंजी उसके हाथ ताला है ..उसकी शोख़ नज़रों ने ज़िन्दगी बदल डाली,अब अँधेरे जीवन में हर तरफ उजाला है ..जब भी पाँव बहके हैं गर्दिशो की ठोकर से,उसने ही मुझे अपने बाँहों में संभाला है,..पल में जिंदगी दे दे पल में जिंदगी ले ले,कैसे उसको हम समझें खेल ही निराला है ..मैं तो गिर गया होता रास्ते की ठोकर से,उसकी जुस्तजू ने ही ऐ “रज़ा” संभाला है..9424336644salimrazarewa

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23 Comments

  1. Arun Kant Shukla 24/09/2017
    • SALIM RAZA REWA 25/09/2017
  2. SALIM RAZA REWA 25/09/2017
  3. C.M. Sharma 25/09/2017
    • SALIM RAZA REWA 25/09/2017
  4. Shishir "Madhukar" 25/09/2017
    • SALIM RAZA REWA 25/09/2017
  5. डी. के. निवातिया 25/09/2017
  6. SALIM RAZA REWA 25/09/2017
  7. Niharika Mohan 25/09/2017
  8. SALIM RAZA REWA 25/09/2017
  9. kiran kapur gulati 25/09/2017
  10. SALIM RAZA REWA 25/09/2017
  11. Bindeshwar prasad sharma 25/09/2017
    • SALIM RAZA REWA 26/09/2017
  12. sarvajit singh 25/09/2017
    • SALIM RAZA REWA 26/09/2017
  13. SALIM RAZA REWA 26/09/2017
  14. SALIM RAZA REWA 26/09/2017
    • SALIM RAZA REWA 27/09/2017
  15. SALIM RAZA REWA 29/09/2017
  16. SALIM RAZA REWA 06/10/2017

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