झूठी शान – शिशिर मधुकर

चाहा बहुत मुझको मगर सच्चा प्रेम ना मिल सकाज़िंदगी सूनी रही और उल्फ़त का गुल ना खिल सकासोचा बहुत मैं दर्द अपना दूसरों से ना कहूं पीड़ा मगर इतनी हुई होठों को मैं ना सिल सका सारी उमंगें सारे सपनें पल में ख़ाक हो गए वक्त ने कुछ ऐसा जकड़ा मैं तो कभी ना हिल सका बेबसी ने इस कदर कुछ हाल मेरा कर दिया लाख चाहा फिर भी बहला कोई भी ना दिल सका कर के बगावत भाग जाऊं छोड़ कर संसार को आवरण झूठी शान का मधुकर मगर ना छिल सका शिशिर मधुकर

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20 Comments

  1. Rinki Raut 23/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 23/09/2017
  2. sarvajit singh 23/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 23/09/2017
  3. Arun Kant Shukla 24/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 24/09/2017
  4. ANU MAHESHWARI 24/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 24/09/2017
  5. C.M. Sharma 25/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 25/09/2017
  6. SALIM RAZA REWA 25/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 25/09/2017
  7. SALIM RAZA REWA 25/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 25/09/2017
  8. Madhu tiwari 25/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 25/09/2017
  9. डी. के. निवातिया 25/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 25/09/2017
  10. Kiran kapur Gulati 15/10/2017
    • Shishir "Madhukar" 15/10/2017

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