मुस्कुराहटें

नहीं मुस्कुराहटों का कोई जवाब छिपें हैं इनमें हजा़रों राज़ चली आती हैं कभी नम आँखों के साथ कभी थम जाती हैं शर्मो हया के साथ चहक जाती हैं कभी मस्त बहारों को देख बयाँ हाले दिल कर जाती हैं मुँह को फेर कभी भरती हैं चाहत करती हैं दिल गुलजा़र कभी गिराती हैं बिजलियाँ जगाती हैं प्यार छल जाती हैं कभी लगता है प्यार शरारतों में भी हरदम रहती शुमार ममता माँ की भी, इन्हीं से होती निसार भर जाती हैं ये जीवन में ख़ुमार ही ख़ुमार चेहरे पे सदा इन्हें सजाए रखना मुस्कुराहटों से ही जि़न्दगी बसाए रखना हैं अन्दाज़ प्यारे २ जाने कितने बेशुमार बिखरती हैं जहाँ,लाती हैं ख़ुशियाँ हजा़रछिपे हैं मुस्कुराहटों में हजा़रों राज़ यह दौलत है एैसी नहीं जिसका जवाब

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19 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 22/09/2017
  2. kiran kapur gulati 22/09/2017
  3. sarvajit singh 22/09/2017
  4. kiran kapur gulati 22/09/2017
  5. ANU MAHESHWARI 22/09/2017
  6. kiran kapur gulati 22/09/2017
  7. Bindeshwar Prasad sharma 22/09/2017
    • kiran kapur gulati 22/09/2017
  8. C.M. Sharma 22/09/2017
    • kiran kapur gulati 22/09/2017
  9. Rinki Raut 22/09/2017
    • kiran kapur gulati 22/09/2017
  10. डी. के. निवातिया 22/09/2017
    • kiran kapur gulati 22/09/2017
  11. Abhishek Rajhans 22/09/2017
    • kiran kapur gulati 22/09/2017
  12. kiran kapur gulati 22/09/2017
  13. SALIM RAZA REWA 25/09/2017
  14. kiran kapur gulati 26/09/2017

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