माता के दरबार में – अनु महेश्वरी

माता के दरबार में,सब की झोली भरती है|गरीब हो या हो अमीर,छोटा हो, या हो बड़ा,भक्ति भाव से जो भी आए,खाली हाथ, यहाँ से न जाए|माता के दरबार में,सब की झोली भरती है|सबका करती बेड़ा पार,तेरे भी सब कष्ट हरेंगी,बस माता को, याद करो,पुरे लगन से, ध्यान धरो|माता के दरबार में तो,सब की झोली भरती है|मन है अगर सच्चा तेरा,भक्ति भी, सार्थक होगी,भक्ति भाव से जो भी आए,खाली हाथ यहाँ से न जाए|माता के दरबार में,सब की झोली भरती है| अनु महेश्वरीचेन्नई

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13 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 21/09/2017
  2. Bindeshwar Prasad sharma 21/09/2017
    • ANU MAHESHWARI 25/09/2017
  3. Shishir "Madhukar" 22/09/2017
    • ANU MAHESHWARI 25/09/2017
  4. kiran kapur gulati 22/09/2017
    • ANU MAHESHWARI 25/09/2017
  5. C.M. Sharma 22/09/2017
    • ANU MAHESHWARI 25/09/2017
  6. Rinki Raut 22/09/2017
    • ANU MAHESHWARI 25/09/2017
  7. डी. के. निवातिया 22/09/2017
    • ANU MAHESHWARI 25/09/2017

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