सच्ची आस्था या ढ़ोंग?

वो है भी या नहीं?यदि है, तो कहाँ?कोई कहे उसे सर्वव्यापीकोई कहे है अंतर्ज्ञानी;कोई उसे महसूस करे,कोई बिना ही उसके गुज़ारा कर ले;कुछ रोज़ाना मंदिर जाएँ,कुछ पाँच दफे नमाज़ पढ़ेंकुछ एक लाल धागे के बल परसारी दुनिया से भी लड़ लें;एक ताबीज़ डाल गले मेंकोई जंग में लहू बहाएमाला जपने में भी कोईवृद्धा अपने दिन बिताएघर की महिला पूजाघर मेउसको दिनभर भोग लगाएरमज़ान मे भूखे पेटकोई महीने भर काम चलाए;श्रद्धा-भाव होने पर भीआपस में वे लड़-भिड़ जाएँहम बड़े हैं, हम भले हैंकहते-कहते जान गवाएँऐसी भी क्या भली वो मूरतजो, खुद पत्थर की है,पूजना है तो उसको पूजोजो शक्ति,तुम्हारे भीतर छिपी बैठी है।-निहारिका मोहन 

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7 Comments

  1. kiran kapur gulati 21/09/2017
  2. Shishir "Madhukar" 21/09/2017
  3. डी. के. निवातिया 21/09/2017
  4. Niharika Mohan 21/09/2017
  5. अरुण कान्त शुक्ला 21/09/2017
    • Niharika Mohan 21/09/2017
  6. C.M. Sharma 22/09/2017

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