‘ज़िन्दगी’ में उल्फ़ियत तो है

‘ज़िन्दगी’ में उल्फ़ियत तो है,सब के मन में बन्दियत तो है।कसर भी नहीं रही कुछ भी,इंसानियत ही तो मन में है।गुमांन करते फिरें शख़्स ख़ुद पर,ऐसी उनमें वसी आवारगी तो है।तमन्ना फड़फड़ातीं तो हैं,बड़ी उलझनों में छिपी ‘ज़िन्दगी’ तो है। सर्वेश कुमार मारुत

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4 Comments

  1. Bindeshwar Prasad sharma 21/09/2017
  2. डी. के. निवातिया 21/09/2017
  3. अरुण कान्त शुक्ला 21/09/2017
  4. C.M. Sharma 22/09/2017

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