खटास – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

पद पैसा और प्रतिष्ठामिल भी जाय अगर रिश्ते में खटास है तो सब बेकार मतलब जीरो शुरू होती है और सिमट भी जाती है यही आदि है तो यही अंत भी जहाँ खुशियाँ नहीं वह श्मशान के बराबर है जहाँ प्रेम नहीं वहॉं शैतान का वाश हो जाता है सुकून ढूढने निकले थे जरूरतों में फंस कर रह गये वाह रे दुनिया वाह रे माया नगरी कहीं पर धूप तो कहीं पर छाँव कोई रो रहा है कहीं खुशियाँ मनायी जा रही है दुख और सुखों का संसार बुझो तो जाने

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5 Comments

  1. C.M. Sharma 19/09/2017
  2. Shishir "Madhukar" 19/09/2017
  3. Ram Gopal Sankhla 19/09/2017
  4. ANU MAHESHWARI 19/09/2017
  5. डी. के. निवातिया 21/09/2017

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