मैने एक ख्वाब देखा था…

मैने एक ख्वाब देखा था,पंख निकलते हीजहाँ नापने का ख्वाब;बेङियों से छूटते हीगलियों में थिरकने का ख्वाब;अंबर नज़र आते हीज़मीन पर न टिकने का ख्वाब;खामोशी की हवा सेबे-लवज़ बतियाने का ख्वाब;उम्मीदों की माटी से निर्मितस्वप्न-महल में रहने का ख्वाब;पर,दायित्वों की गठरी हैसंग मे जनाब,व असलियत से आँखें चुरानाहोगा यह एक घोर अपराध।-निहारिका मोहन

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14 Comments

  1. Abhishek Rajhans 17/09/2017
    • Niharika Mohan 20/09/2017
  2. Madhu tiwari 17/09/2017
    • Niharika Mohan 20/09/2017
  3. kiran kapur gulati 18/09/2017
    • Niharika Mohan 20/09/2017
  4. Bindeshwar Prasad sharma 18/09/2017
    • Niharika Mohan 20/09/2017
  5. C.M. Sharma 18/09/2017
    • Niharika Mohan 20/09/2017
  6. Shishir "Madhukar" 18/09/2017
    • Niharika Mohan 20/09/2017
  7. डी. के. निवातिया 18/09/2017
    • Niharika Mohan 20/09/2017

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