शायद….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

सपनों से निकल हकीकत तुम बन जाओ….चाँदनी बन मुझमें तुम कभी सिमट जाओ…रात रौशन हो जायेगी मेरी तुमसे ए सनम…आँचल से मुझपे तारों को छिटका जाओ…हो कहीं भी सहर खिली सी मुझे क्या,गर…बन आफताब तुम मेरे रूबरू न हो जाओ..मयकदे के प्याले बड़े रूखे सूखे से हैं सभी…ज़रा सी शोख नज़रों से इन्हें छलका जाओ…कौन जीता है इंतज़ार में अपनी ही मर्ज़ी में..हो तेरी मर्ज़ी तो तकदीर मेरी बदल जाओ…सबा के संग कभी चुप्पके से तुम आ जाओ…सहरा सी खामोशी में पायल छनका जाओ…हम तो भटकते रहते हैं इस उम्मीद में ‘चन्दर’..गुज़रो तुम इधर से तो शायद हमें मिल जाओ…\/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

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20 Comments

  1. Shishir Madhukar 16/09/2017
    • C.M. Sharma 16/09/2017
    • C.M. Sharma 16/09/2017
  2. डी. के. निवातिया 16/09/2017
  3. Rajeev Gupta 16/09/2017
    • C.M. Sharma 16/09/2017
  4. Saviakna 16/09/2017
    • C.M. Sharma 16/09/2017
  5. Bindeshwar Prasad sharma 16/09/2017
    • C.M. Sharma 16/09/2017
  6. Anu Maheshwari 16/09/2017
    • C.M. Sharma 16/09/2017
  7. Madhu tiwari 16/09/2017
    • C.M. Sharma 16/09/2017
  8. kiran kapur gulati 18/09/2017
    • C.M. Sharma 18/09/2017
  9. Meena Bhardwaj 18/09/2017
    • C.M. Sharma 19/09/2017
  10. Rinki Raut 22/09/2017
    • C.M. Sharma 23/09/2017

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