अधूरा रह गया – सोनू सहगम

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Sonu Sahgam

:- -: अधूरा रह गया :-गुजरे जमाने को मैं बस याद करके रह गयावो मेरे घर आया और मैं बिन मिले ही रह गयाकहते है गूंजी थी बेबाक हंसी उसकी मेरे घरऔर मैं बदनसीब उन्हे सुने बिना ही रह गयाचंद लफ्ज जो आए थे अधरों पर मेरे, कहने कोमौका था, था दस्तूर भी, मगर हाथ मलते रह गयाभेजा था पैगाम उसकी रेशम सी जुल्फों ने हवाओं सेकमबख्त झोका पवन का मुझ तक आते आते रह गयाबताया आईने ने मेरे कमरे के, कैसे वो सज कर आईऔर मैं दूर ही बस कल्पनाओं मे गोते लगाता रह गयासुना है खफा है वो मुझसे, ना मेरे मिलने परउसे क्या मालूम मेरे चाँद का दीदार अधूरा रह गया*सोनू सहगम*

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12 Comments

  1. C.M. Sharma 16/09/2017
    • Sonu Sahgam 30/09/2017
  2. Randeep Choudhary 16/09/2017
    • Sonu Sahgam 30/09/2017
  3. Shishir "Madhukar" 16/09/2017
    • Sonu Sahgam 30/09/2017
  4. डी. के. निवातिया 16/09/2017
    • Sonu Sahgam 30/09/2017
  5. Bindeshwar Prasad sharma 16/09/2017
    • Sonu Sahgam 30/09/2017
  6. Madhu tiwari 16/09/2017
    • Sonu Sahgam 30/09/2017

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