मैं ऐसे बना

मैं ऐसे बनापहाड़ को तोड़करनदी को मोड़करतालो को खोलकरज़हर खून में घोलकरफिर लगी जो आगउससे एक फूल खिलाफूल से था में बनाउस हिरन के पीछे भागा जब भागीनहीं बचा था कोई उसका साथी आया जब वो खूंखार शेरलाशो के बिछ गए ढेरउस ढेर में जो हाथ मिला जिसने हिला दिया पूरा ज़िलाउस ढेर से था मैं बनाद्वारा – मोहित सिंह चाहर ‘हित’

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3 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 14/09/2017
    • hitishere hitishere 14/09/2017
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/09/2017

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