तुम ना मिली

शीर्षक–तुम ना मिलीभींगी आंखे जब खुदा से फरियाद करती थीलबो पे तेरी बात होती थीजब साँसों में तेरी साँस होती थीवो दर्द था कांच के चुभन जैसाजब जिस्म मेतेरे वफ़ा का निशां होता थाजब आँखों को तेरे दीदार का इंतज़ार होता थाजब दिल कोतुझपे एतबार होता थापता नहीं क्योंतुम रूठी तेरी वफ़ा शीशे जैसी टूटीतेरे संगजीने की कोशिश छुटीआँखों से सपना टुटातेरे संग बीताया लम्हारेत की माफिक फिसलाभोर को सांझ का साथ ना मिलामेरे दर्पण को तेरा अक्स ना मिलाना तेरा ठिकाना मिलाना तुझसे मिलने का बहाना मिला—अभिषेक राजहंस

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5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 14/09/2017
  2. babucm 14/09/2017
  3. Bindeshwar Prasad sharma 14/09/2017
  4. डी. के. निवातिया 14/09/2017

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