मन

        मन

मन की आश जो सो जाएये हसरत जो हो जाएमिल जाए उस ख्वाईस कोजो मन को बहला जाए कभी तन्हा आसमा भीरात की पाली,चाँद-सितारेंमैं भी तो हूँ तन्हाआसा तो साथी बारिस पधारे कभी तो तन्हा बादल भीबिन बारिश केपर हवा के संग चलेमैं भी तो हूँ तन्हासाथ मेरे बस उमंग चले अरे बादल फिर तू आजामन को तु बहला जामन पर तो उदासी छाईहर्ष भरी अपने बूंदों सेमन को नहला जा खो गया हैं आशाखोया दिलाशाबादल तु क्यु खो गयातेरे बिन मन मेरा प्यासाबादल तु क्यु खो गयाफिर ये मन क्यु सो गया✍✍✍✍मु.जुबेर हुसैन

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7 Comments

  1. babucm 09/09/2017
    • md. juber husain 04/10/2017
  2. md juber husain 10/09/2017
  3. Bindeshwar Prasad sharma 10/09/2017
  4. md. juber husain 11/09/2017
  5. डी. के. निवातिया 11/09/2017
  6. md. juber husain 13/10/2017

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