कितने सयाने हो गए – शिशिर मधुकर

वो अपने दर्द के सब रिश्ते पुराने हो गए देख लो तुम भी अब कितने सयाने हो गए एक समय वो भी था तुम मेरे नज़दीक थेअब तो रुखसार को देखे ज़माने हो गए मेरे जीवन में तो बस एक तपती धूप थी वो तो तुम आ गए ये मौसम सुहाने हो गए वक्त का क्या करें इसको न कोई जान सका कभी अपने जो थे वो अब बेगाने हो गएकिसकी नज़र मधुकर लगी इस घर को मेरेदौर ए महफिल की जगह बस वीराने हो गएशिशिर मधुकर

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18 Comments

  1. bhupendradave 09/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 09/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 09/09/2017
  2. ANU MAHESHWARI 09/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 10/09/2017
  3. babucm 09/09/2017
    • babucm 09/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 10/09/2017
  4. kiran kapur gulati 09/09/2017
    • kiran kapur gulati 10/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 10/09/2017
  5. अरुण कान्त शुक्ला 10/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 10/09/2017
  6. Bindeshwar Prasad sharma 10/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 11/09/2017
  7. डी. के. निवातिया 11/09/2017
    • Shishir "Madhukar" 11/09/2017

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