वाह रे दुनिया – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

वाह रे दुनिया वाह रे देश ऐश कर लोबदल कर वेश। कहने का कलियुग है आयाममता मोह से भरी है माया इतना बड़ा जंजाल को देखोअपने विवेक से उसे निरेखो। बिन शादी के बनते बापकौन करेगा इनको माफकानून से भी खौफ नहीं ये बढ़ते जाते करते पाप। विकट समय है देखो आया सबका सब है मन भरमायाबाबाओं जैसा हाल न करना चाहे आप जहाँ भी रहना। वाह रे मानव वाह रे राज़ कर्म से बड़ा न दूजा काज।

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7 Comments

  1. Madhu tiwari 08/09/2017
    • Bindeshwar Prasad sharma 08/09/2017
  2. shashikant shandile 08/09/2017
  3. ANU MAHESHWARI 08/09/2017
  4. babucm 09/09/2017
  5. डी. के. निवातिया 11/09/2017

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