चर्चा अब खुलकर होनी चाहिए — डी के निवातिया

चर्चा अब खुलकर होनी चाहिए

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कुछ हो न हो चर्चा अब खुलकर होनी चाहिएघर से संसद तक बहस जमकर होनी चाहिए !!

सियासत के गलियारों की भी कोई हद तय होये क़ानून बनाने की मांग डटकर होनी चाहिए !!

राजनीति की आड़ में क्यों फल फूलते है दुष्चरये मंत्रणा भी जन-गण से मिलकर होनी चाहिए !!

जुर्म का कुहासा ढाँपे है सुकर्म के उजले चाँद कोअर्थ की चर्चा इस अनर्थ से बचकर होनी चाहिए !!

किरण धूमिल न हो लिपटकर लालच फरेब मेंबात इस अन्धकार से निकलकर होनी चाहिए !!

अनैतिक संकीर्ण मानसिकता घातक है सबके लिएदेश रक्षा और विकास की चर्चा दर-दर होनी चाहिए !!

विलासिता का सर्प निगल रहा नवपीढ़ी का ज्ञाननस्ल को बचाने की इंतज़ाम कारगर होनी चाहिए !!

जनता के हाथ सब कुछ फिर भी हाथ खाली हैबेपर्दा हो ये राज़ बात ऐसी हटकर होनी चाहिए !!

बात कड़वी हो मगर सच्ची हो तो ‘धर्म’ डरता नहींदिल की आवाज़ सुर में सुर तानकर होनी चाहिये !!!!!डी के निवातिया

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28 Comments

  1. Madhu tiwari 07/09/2017
    • डी. के. निवातिया 28/09/2017
  2. shashikant shandile 07/09/2017
    • डी. के. निवातिया 28/09/2017
  3. babucm 08/09/2017
    • डी. के. निवातिया 28/09/2017
  4. kiran kapur gulati 08/09/2017
    • डी. के. निवातिया 28/09/2017
    • डी. के. निवातिया 28/09/2017
  5. Bindeshwar Prasad sharma 08/09/2017
    • डी. के. निवातिया 28/09/2017
  6. Shishir "Madhukar" 08/09/2017
    • डी. के. निवातिया 28/09/2017
  7. ANU MAHESHWARI 08/09/2017
    • डी. के. निवातिया 28/09/2017
  8. md juber husain 10/09/2017
    • डी. के. निवातिया 28/09/2017
  9. Ramesh Phartiyal 12/09/2017
    • डी. के. निवातिया 28/09/2017
  10. अनुज तिवारी 13/09/2017
    • डी. के. निवातिया 28/09/2017
  11. Siddharth Singh 14/09/2017
    • डी. के. निवातिया 28/09/2017
  12. jagdish prasad 14/09/2017
    • डी. के. निवातिया 28/09/2017
  13. Vikram jajbaati 02/10/2017
    • डी. के. निवातिया 03/10/2017

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