फूलो के इम्तिहान का

कवि: शिवदत्त श्रोत्रिय

मंदिर में काटों ने अपनी जगह बना लीवक़्त आ गया है फूलो के इम्तिहान का  ||सूरत बदलने की कल वो बात करता थालापता है पता आज उसके मकान का ||निगाह उठी आज तो महसूस करता हूँलाल सा दिखने लगा रंग आसमान का ||लुटेरों की हुक़ूमत जहाजों पर हो गयीअंदाजा किसे है दरिया के नुकसान का ||आइना कहाँ दुनियाँ की नजर में  “शिव”अपने ही सबूत मांगते तेरी पहचान का ||

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8 Comments

  1. डी. के. निवातिया 07/09/2017
    • shivdutt 07/09/2017
  2. babucm 08/09/2017
  3. Madhu tiwari 08/09/2017

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