चांदनी – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

ये है जाहिर कि तुम चाँद हो चाँदनी रूप ऐसे कि जैसे तुम मंदाकिनी। तुमसे खुशबू चमन के महक जायेंगे नादां दिल से ये दुनिया बहक जायेंगे। चाल नागन की जैसी नसीली भी है रंग गोरी गुलाबी रसीली भी है। आंखे हिरनी के जैसे कजरारी है होठ मखमल सी कैसे बलहारी है। तेरी पतली कमर तेरी तिरछी नजरबाल रेशम घटा सी ये बाली उमर। जहां जाओ बिजली ये चमक जाएगी बरसात होगी जहां भी झमक जाएगी। तेरी चुनरी यौवन को ललचाती है तेरी मुस्कान चेहरे को भरमाती है। तेरे पायल के घुँघरू झनकते भी है तेरी चूडी बाहों मे खनकते भी है। होठ लाली बिंदिया कानबाली भी है गोल चेहरे पर तिल एक कली भी है। सब कुछ तेरी है दुनिया कुछ भी नहीं जो भी ले लो अफसोस कुछ भी नहीं। कायल बिन्दु है तेरा उम्र भर के लिये नाम होता है रहमों करम के लिये।

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6 Comments

  1. babucm 04/09/2017
  2. Shishir "Madhukar" 04/09/2017
  3. डी. के. निवातिया 04/09/2017
  4. ANU MAHESHWARI 04/09/2017
  5. Madhu tiwari 04/09/2017

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