यादें

यादें kiran kapur gulati किरन कपूर गुलाटी चलते चलते थम से गएपेड़ों की छाँव में पांव ठिठक कर रह गए यादों के गाँव में कदम भी मद्धम हो गए रफ़्तार अपनी छोड़ करइक इक नज़ारा याद आयाबढ़ते हुए हर मोड़ परयाद आया फिर वोः बालपनदिल वोःपुरसुकून साबचपन की कुछ सहेलियांकुछ यौवन की मस्त पहेलियाँआयी याद खिलन वोः धूप कीऔर जाड्डे की सर्द रातें भीपंख लगाये उड़ता था मनहल्का हो बादलों की तरहन सीमाओं का ही बोध थान थीं कोई पाबंदियांसुहाना था बहुत वोः बचपन का आलमबेफिक्र मन खिलखिलाने का आलमताज़ा हैं वोः यादें आज भीजैसे कल की ही तो बात होछिटकी हुई सी चांदनी और तारों भरी वोः रात हो

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

19 Comments

  1. Meena Bhardwaj 03/09/2017
    • kiran kapur gulati 03/09/2017
  2. md juber 03/09/2017
    • kiran kapur gulati 03/09/2017
  3. Shishir "Madhukar" 03/09/2017
  4. kiran kapur gulati 03/09/2017
    • kiran kapur gulati 04/09/2017
  5. ANU MAHESHWARI 04/09/2017
    • kiran kapur gulati 04/09/2017
  6. Madhu tiwari 04/09/2017
    • kiran kapur gulati 04/09/2017
  7. Bindeshwar Prasad sharma 04/09/2017
  8. kiran kapur gulati 04/09/2017
  9. डी. के. निवातिया 05/09/2017
    • kiran kapur gulati 05/10/2017
  10. babucm 05/09/2017
    • kiran kapur gulati 05/10/2017
    • kiran kapur gulati 05/10/2017

Leave a Reply to Madhu tiwari Cancel reply