वो जानवर है

शीर्षक-वो जानवर हैवो इंसान हैशायद हमारी तरह नहीं दिखताउसकी सूरत नहीं मिलती हमसेकोई भी देख डर जाएउसे देखते शायदसाँसे थम जाएअलबत्तावो इंसान ही तो हैहमारी तरह दोपाया ना सहीचौपाया ही सही कई मायनों में हम इंसानों से बेहतरपेट की आग स्वाहा हो जाएबच्चे उसके भूखे ना सो जाएउसका भोर सूरज संग हो जाएउसका सांझ बीत जाएबस इतना ही तो उस इंसान को चाहिए। वो इंसान ही तो है या शायद नहीं क्योंकि वो हम इंसानों की तरह अपनों से छल नहीं करता ना वो किसी से आशा रखता ना कोई अभिलाषा ना खुद को गुलाम मानता ना आजादी की चाहत रखता वो रोटी के लिए गले नहीं काटता अपने स्वार्थ के लिए अपनों को बलि नहीं चढ़ाता ना वो डंसता ना नोचता -खसोटता वो तो अपनी खाता अपनों में ही जीता-मरता शायद इसलिए की वो इंसान नहीं वो जानवर है—–अभिषेक राजहंस

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4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 02/09/2017
    • sukhmangal singh 03/09/2017
  2. Madhu tiwari 02/09/2017
  3. babucm 04/09/2017

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