माँ है वो मेरी !! – इस कविता रचना में मेरे और माँ के बीच के प्रेम व् परिस्थिति का विवरण है !

माँ है वो मेरी।
मुझको जग में लाने वाली ममतामयी है माँ मेरी।कैसे करू मै उसकी सेवा ये समझ आता नहीं।अपने ममता के स्पर्श से जिसने किया मुझे बहुत लाड।याद आती है उसकी जब नहीं रहती वो मेरे साथ॥
किया बचपन में हम दोनों ने खूब सारी मस्ती।घूमती थी मुझे लेकर कभी शहर तो कभी बस्ती।ऐसे मस्त समय के बाद फिर कभी न वो समय आया।जब हम दोनों ने एक दूसरे के साथ बहुत सारा वक्त बिताया।
बढ़ा हुआ तो समझदारी और जिम्मेदारी का बंधन छाया।उम्र के बढ़ते बढ़ते मैंने माँ का अनेक दर्शन पाया।हालात और समय ने माँ को क्या से क्या बनाया।कभी काली तो कभी दुर्गा तो कभी करुणामयी रूप का दर्शन करवाया॥
क्लेश सागर से प्रेमसागर तक मुझे तैरना सिखालाया।खुद डूब गयी थी उसमें ये अनुभव मुझे अपना बताया।मैंने अश्रु को पोंछते हुए ये अनुभव उससे पाया।न जाने कैसी धैर्य की नौका से उसने अपने आप को इस क्लेश से बचाया॥
जीवन के अधिकांश भाग में उसने कष्ट ही पाया।फिर इस कष्ट को नष्ट कैसे करना है ये मार्ग उसने बतलाया।मेरे जीवन की जननी है वो इस बात का सौभाग्य मैंने पाया।माँ है वो मेरी, प्रेरणा स्रोत है वो तभी तो प्रेरणा की ज्योत जलाना सिख पाया॥
वैसे माँ से प्रेम प्रदर्शित करने के लिए कोई दिन, कोई समय काफी नही है क्योंकि माँ का प्यार हमसे हमेशा ज्यादा ही रहेगा लेकिन ये एक रचना है जिससे मै माँ के प्रति अपनी भावनाओ को व्यक्त करके उनको कुछ पल के लिए खुश कर सकू।
इस कविता को बनाने के लिए प्रेरित करने वाली प्रेरणा स्रोत को बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

9 Comments

  1. डी. के. निवातिया 30/08/2017
  2. babucm 31/08/2017
  3. Madhu tiwari 31/08/2017
  4. Shishir "Madhukar" 31/08/2017

Leave a Reply to विजय कुमार सिंह Cancel reply