मैं जग मचाया शोर…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

II छंद – गीतिका  IIअपनी अपनी सब कहते, अपनी ना पहचाने….अपने को जब खो बैठे, आयी अक्ल ठिकाने…चोरों का सरदार बना, लिए धर्म का ठेका…कोवा हंस बना जब हो, होगा क्या खुदा का…मन चंचंल फिरा भागा, बिना पैर ओ सर के….नहीं ठोर जब मन में तो,वन वन है फिर भटके…खोजत खोजत सब घूमा, मिला नहीं मुझे चोर…वो मेरे अन्दर ही था, मैं जग मचाया शोर….\/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)(२६ मात्रा, १४-१२ यति, विषम चरणान्त दोहे जैसा)

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16 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 29/08/2017
    • babucm 30/08/2017
  2. Shishir "Madhukar" 29/08/2017
    • babucm 30/08/2017
  3. chandramohan kisku 29/08/2017
    • babucm 30/08/2017
  4. Madhu tiwari 29/08/2017
    • babucm 30/08/2017
  5. Bindeshwar Prasad sharma 30/08/2017
    • babucm 31/08/2017
  6. Meena Bhardwaj 30/08/2017
    • babucm 31/08/2017
  7. डी. के. निवातिया 30/08/2017
    • babucm 31/08/2017
    • babucm 04/09/2017

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