जब भी देखूँ वो मुझे चाँद नज़र आता है – ग़ज़ल

जब भी देखूँ वो मुझे चाँद नज़र आता है ! रोशनी बन के दिलो जाँ मे समा जाता है !! उस हसीं शोख़ का दीदार हुआ है जब से !उसका ही चेहरा हरेक शै में नज़र आता है !! मै मनाऊँ तो भला कैसे मनाऊँ उसको ! मेरा महबूब तो बच्चो सा मचल जाता है !! क्यूं भला मान लूँ ये इश्क़ नहीं है उसका ! छु्‍पके तन्हाई में गीतों को मेरे गाता है !! मैं तुझे चाँद कहूँ फूल कहूँ या खुश्बू ! तेरा ही चेहरा हरेक शै में नज़र आता है !! आज भी उसके है सीने में मुहब्बत मेरी ! जबभी मिलता है वो शरमा के निकल जाता है !! ऐसे इन्सां पे ”रज़ा” कैसे भरोसा करलें ! करके वादा जो हमेशा ही मुकर जाता है !!9424336644 SALIM RAZA REWA

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12 Comments

    • SALIM RAZA REWA 27/08/2017
  1. Madhu tiwari 27/08/2017
    • SALIM RAZA REWA 27/08/2017
  2. sukhmangal singh 28/08/2017
    • SALIM RAZA REWA 29/08/2017
  3. babucm 28/08/2017
    • SALIM RAZA REWA 29/08/2017
  4. डी. के. निवातिया 28/08/2017
    • SALIM RAZA REWA 29/08/2017
  5. Shishir "Madhukar" 28/08/2017
  6. SALIM RAZA REWA 29/08/2017

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