चिंता और चिंतन

ना दिल को सुकून है,ना दिमाग को आराम है lहर कोई चिंतित है, हर कोई यहाँ परेशान है llचिंता इंसान के दिलो दिमाग पर छा रही है lचिंता की ये लकीरे, साफ नज़र आ रही है llचिंता स्वयं नहीं आती हम ही उसे बुलाते है lजब जरूरत से ज्यादा अपनी इच्छा जताते है llबुरा नहीं अपनी इन इच्छाओ को पंख लगाना lबुरा है इसे पूरा करने में दूजे को हानि पहुंचना llकरना है तो चिंता नहीं,  चिंतन करो मेरे भाई lचिंता से अशांति जन्मे,चिंतन से आत्मबुद्धि आई llचिंता चिता सामान है, नर को निर्जीव बनाती है lचिंतन से ही जीवन में सुख शांति मिल पाती है llमाना चिंतन में भी चिंता का कुछ अंश समाया हैlचिंतन से आत्मसुख का ज्ञान उभर कर आया है llजब चिंतन से आत्मज्ञान की अनुभूति हो जाएगीlसच कहता हूँ तब चिंता तुम्हें छू भी नहीं पायेगी ll——————–

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16 Comments

  1. Madhu tiwari 26/08/2017
    • Rajeev Gupta 27/08/2017
  2. ANU MAHESHWARI 27/08/2017
    • Rajeev Gupta 27/08/2017
    • Rajeev Gupta 27/08/2017
  3. Meena Bhardwaj 27/08/2017
    • Rajeev Gupta 28/08/2017
  4. babucm 28/08/2017
    • Rajeev Gupta 28/08/2017
  5. डी. के. निवातिया 28/08/2017
    • Rajeev Gupta 28/08/2017
  6. kamlesh sanjida 28/08/2017
    • Rajeev Gupta 28/08/2017
  7. Shishir "Madhukar" 28/08/2017
    • Rajeev Gupta 28/08/2017

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