आशा बहुत है – अजय कुमार मल्लाह

आती नहीं रूबरू हकीक़त में उसे तलाशा बहुत है,उसके ना होने से मेरी जिन्दगी में निराशा बहुत है,कब वो ख़्वाबों से निकल कर मेरे सामने आएगी,उसके दीदार की मेरे दिल को आशा बहुत है।देख लूं एक झलक उसकी मन प्यासा बहुत है,खुदा ने भी उसे अपने हुनर से तराशा बहुत है,वो आयी है इस दुनिया में बस मेरी ही खातिर,ऐसा विश्वास तो नहीं मुझको पर आशा बहुत है।दिल की कहने के लिए नैनों की भाषा बहुत है,दर्द कम करने को किसी का दिलासा बहुत है,बिन कहे ही वो मेरे सभी जज़्बात समझ लेगी,अपनी आशा से मुझको भी आशा बहुत है।

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10 Comments

  1. Meena Bhardwaj 25/08/2017
  2. ANU MAHESHWARI 25/08/2017
  3. Shishir "Madhukar" 26/08/2017
  4. babucm 26/08/2017
  5. डी. के. निवातिया 26/08/2017

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