आशिक़ तुम्हारा हूँ – अजय कुमार मल्लाह

आँसुओं में लिपटकर के निकल जाऊंगा आँखों सेअपनी आँख का मुझको वो काजल समझती हो,आता है गरजना सिर्फ बरसना याद नहीं जिसकोबेवजह जो करता शोर है वो बादल समझती हो,मुझे एहसास है तुमको भी मुझसे प्यार बहुत हैतुमसे मिलने को दिल मेरा भी बेकरार बहुत है….है तुम्हें प्यार गर मुझसे तो तुम भी ये जान लोमैं भी आशिक़ तुम्हारा हूँ मुझे पागल समझती हो।

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11 Comments

  1. babucm 25/08/2017
  2. Madhu tiwari 25/08/2017
  3. डी. के. निवातिया 25/08/2017
  4. Meena Bhardwaj 25/08/2017
  5. Shishir "Madhukar" 26/08/2017

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