खुशी ढूढने निकला हूँ – मनुराज वार्ष्णेय

खुशी ढूढने निकला हूँ पर मन मेरा क्यों उदास हैचैन नही मिलता क्यों मुझको बस बेचैनी ही पास हैक्यों दुखी आज मैं हूँ इतना क्यों मन मे इतने सवाल हैआँख बंद जो करता तो क्यों दिखते इतने ववाल हैहै प्यार दूर मुझसे तो क्यासमझू यही वजह कुछ खास हैगर ऐसा है कुछ मेरे साथतो उस पल की मुझको तलाश हैप्रिय मिलन की मुझको आश हैप्रिय मिलन की मुझको आश है कवि- मनुराज वार्ष्णेय

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6 Comments

  1. babucm 25/08/2017
  2. Madhu tiwari 25/08/2017
  3. डी. के. निवातिया 25/08/2017

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