जहाँ छाया मिली – शिशिर मधुकर

राहे मुहब्बत में कभी तो नाम कर लिया बना के दूरियां तुमने खुद को फिर आम कर लिया कभी होठों से लग के जो मेरी नस नस में पहुंचा थानहीं मिलता है मयखाने में खुद को वो जाम कर लिया अंधेरे ढल चुके थे ज़िन्दगी भी गीत गाती थी सुबह ने जल के सूरज में खुद को फिर शाम कर लिया किसी को प्यार करते वक्त ग़र सब भेद मिट जाएं मुहब्बत में समझो उसने खुद को निष्काम कर लिया यहाँ जीवन की राहों में धूप अक्सर ही मिलती है जहाँ छाया मिली मधुकर वहीं आराम कर लिया शिशिर मधुकर

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18 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 23/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 23/08/2017
  2. Bindeshwar Prasad sharma 23/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 23/08/2017
  3. meena 23/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 23/08/2017
  4. डी. के. निवातिया 23/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 23/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 23/08/2017
  5. Madhu tiwari 24/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 24/08/2017
  6. babucm 24/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 24/08/2017
      • babucm 24/08/2017
        • Shishir "Madhukar" 24/08/2017
  7. Kajalsoni 24/08/2017
    • Shishir "Madhukar" 24/08/2017

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